प्रदेश में यूरिया का बड़ा संकट, किसानों में हाहाकार मचा! 

 



 




 


प्रदेश में यूरिया का बड़ा संकट, किसानों में हाहाकार मचा! 
- खेती का रकबा बढ़ते ही प्रदेश में यूरिया घटने लगा, किसानों का आक्रोश फूटा 
इंदौर। भारतीय किसान एवं मजदूर सेना के प्रदेश अध्यक्ष बबलू जाधव ने कहा कि प्रदेश के किसानों के पास आजकल यूरिया के लिए लाइन में लगने का ही काम रह गया है। किसान आधी रात से खाद की सरकारी दुकानों के बाहर लाइन लगा लेते हैं। कई बार तो उन्हें  सुबह पता चलता है कि आज तो यूरिया बंटनी ही नहीं है!   
  दो फसलें अतिवर्षा ने खराब कर दीं और तीसरी पर यूरिया की मार पड़ रही है। यदि हफ्तेभर में यूरिया की सप्लाई दुरुस्त नहीं हुई, तो किसान या तो बरबाद हो जाएंगे या बौखला जाएंगे! किसान अगर चेहरे के भाव दबा भी लें, तो महिलाओं के चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ दिख रही है। बबलू जाधव ने कहा कि धरना-प्रदर्शन करने तक का समय अभी नहीं है। सरकार तक आवाज पहुंच सके, अब तो जो एक बोरी यूरिया है, वही हमारे लिए भगवान है। इस तरह की शिकायतें भी बड़े पैमाने पर आ रही है, कि सहकारी समिति में खाद उपलब्ध नहीं हो रही, पर निजी दुकानों पर ऊंचे दाम पर यूरिया मिल रही है। राज्य सरकारों की लचर वितरण प्रणाली भी किसान की दुश्मन बन रही है। प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ और अन्य मंत्रियों द्वारा कहा जा रहा है, कि प्रदेश में यूरिया की कमी नहीं है। बहुत जल्दी वितरण व्यवस्था सुधार ली जाएगी! इसके अलावा सहकारी समितियों से अब 60 की जगह 70 फीसदी यूरिया बेची जाएगी! लेकिन, लगता है सरकार ने कदम उठाने में बहुत देर कर दी। प्रदेश के किसान को सरकार बौनी के समय खाद नहीं दे पा रही है, जबकि यूरिया की जमकर कालाबाजारी हो रही है। 
  उन्होंने कहा कि इंदौर जिले की देपालपुर तहसील सेवा सहकारी संस्था औरंगपुरा मैं केवल रेगुलर किसानों को नकद में यूरिया दिया जा रहा है। यही हालात दूसरी सोसाइटी में भी है। अभी जयपालपुर (तहसील सांवेर) में हालात इतने खराब है कि यूरिया के लिए किसान दर दर की ठोकर खा रहे हैं। वही देपालपुर तहसील की सोसायटी में भी खाद उपलब्ध नहीं है। 

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