वाटर हार्वेस्टिंग करना जरुरी, निगम  ने भारी भरकम जुर्माना तय किया! 
वाटर हार्वेस्टिंग करना जरुरी, निगम 

ने भारी भरकम जुर्माना तय किया!

-  आवासीय व व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए शुल्क व दंड तय 

  इंदौर। नगर निगम ने शहर में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य कर दिया है। मकानों के नए नक्शों में हार्वेस्टिंग सिस्टम होने पर ही उन्हें पास किया जा रहा है! जबकि, पुराने मकानों में अनिवार्यता के साथ दंड भी तय कर दिया गया। व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर एक लाख रुपए तक दंड का प्रावधान है। वाहन र्विसिंग सेंटरों के लिए नियम बनाए गए हैं।  

  शहर में भूजल स्तर बढ़ाने की कवायद में निगम तेजी से लग गया है। कचरे के निष्पादन में अव्वलता हांसिल करने के बाद अब पानी संग्रहण व सप्लाय व्यवस्था पर भी फोकस किया जा रहा है। खासकर बारिश का पानी संग्रहण पर निगम का जोर है। इसके लिए वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने के आदेश जारी किए हैं। वर्तमान में व्यावसायिक व रहवासी प्लॉटों के नक्शे तैयार हो रहे हैं, उसमें वाटर हार्वेस्टिंग की अनिवार्यता की गई है। वहीं, जो पुराने आवास या प्रतिष्ठान हैं, उनकी छतों पर भी वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य किया है। इसके लिए आवासीय व व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए अलग-अलग शुल्क व दंड निर्धारित किया है। आवासों के लिए 5 से 25 हजार तथा व्यावसायिक पर एक लाख रुपए दंड चुकाने की बात कही है। जलकार्य समिति प्रभारी बलराम वर्मा ने बताया कि इस बार अपेक्षा से अधिक बारिश हुई है, जो शहर के लिए सुखद है। निगम परिषद में रखे जाने वाले प्रस्ताव के अनुसार 60 दिनों में सिस्टम लगाना अनिवार्य होगा। आवासीय इकाई में पांच साइज के प्लाट अनुसार अर्थदंड तय किया है। जिसमें 1500 वर्गफीट के लिए 5 हजार, 1500 से 2000 तक 10 हजार, 2500 से 3000 तक 15 हजार, 3500 से 4500 तक 20 हजार और 4500 से अधिक पर 25 हजार रुपए जुर्माना लगेगा। इस अवधि में सिस्टम नहीं लगाया तो रहवासी को प्रतिदिन 500 रुपए के मान से पैनल्टी लगेगी। 
अलग-अलग शुल्क
  व्यावसायिक  की शुरुआत 2500 वर्गफीट से की गई है। जहां 25 हजार का जुर्माना, 5 हजार पर 35 हजार, 5 से 7 हजार पर 50 हजार, 7 से 10 हजार पर 75 हजार तथा 10 हजार से अधिक पर 1 लाख रुपए जुर्माना वसूला जाएगा। 
सर्विस सेंटरों पर भी नियम
  शहर में कुकुरमुत्तों की तरह वाहनों के सर्विस सेंटर संचालित हो रहे हैं। इसमें से अधिकांश संचालक बोरिंग व नर्मदा का पानी उपयोग करते हैं। कई संचालकों ने अवैध बोरिंग लगा रखे हैं। वाहनों की धुलाई  में हजारों गैलन पानी व्यर्थ बहा दिया जाता है। इन्हें रोकने की हिमाकत क्षेत्रीय पार्षद व अधिकारी तक नहीं कर पाते। निगम अब ऐसे सर्विस सेंटरों पर कड़े कदम उठाने जा रहा है। जलकार्य समिति प्रभारी की मानें तो सर्विस सेंटरों की जांच की जा रही है। नल व बोरिंग कनेक्शन का सर्वे किया जाएगा। इसके बाद वहां उपयोग होने वाली पानी का शुल्क निर्धारित करेंगे। 3 अक्टूबर को निगम परिषद की बैठक में शुल्क निर्धारण कर दिया जाएगा।
  निगम आयुक्त आशीष सिंह ने बताया कि उक्त नियम का प्रावधान केन्द्रीय शहरी विकास मंत्रालय द्वारा जारी गाइड लाइन व मप्र म्युनिसिपल कारपोरेशन एक्ट 1956 में  मप्र नगरीय प्रशासन और विकास विभाग द्वारा संशोधित कर लागू किया गया है, जो 3 अक्टूबर को एमआईसी बैठक में पारित कर दिया जाएगा। गैरेज व सर्विस सेंटर संचालकों को  वाहनों की धुलाई के लिए नियमानुसार व्यावसायिक कनेक्शन लेना होगा। यदि जांच के बाद कनेक्शन व्यावसायिक नहीं पाया जाता है तो पिछले 6 माह की दोगुना राशि वसूलकर कनेक्शन को व्यावसायिक किया जाएगा। 
बर्बादी की तो फटका
   शहर के सभी 19 झोन के सीएसआई सहित कर्मचारियों को पानी बर्बादी करने वालों पर नजर रखेंगे। पहली बार में पानी की बर्बादी पर सौ रुप स्पाट फाइन, इसके बाद 5 सौ, फिर जुर्माना राशि 20 प्रतिशत बढ़ा दी जाएगी। इसके लिए ऐसे स्थान अथवा आवास संसम्थान जहां नल पर टोटी नहीं लगाई गई है, इन भवनों के मालिकों से पेनल्टी वसूली जाएगी। 
50 हजार तक जुर्माना
निगम के इस जलसंचय एक्ट में सार्वजनिक जल संरचनाओं को गंदा करने वालों पर जुर्माना राशि बढ़ा दी है। इसके तहत पहली बार में 5 हजार से 50 हजार तक जुर्माना वसूला जाएगा। नालियों, बैकलाइ में कचरा, गंदगी डालने वालों पर भी जुर्माना लगेगा। बागवानी और भवन निर्माण के लिए कौनसे पानी का उपयोग किया जा रहा है, इसकी बर्बादी पर भी जुर्माना लगाया जाएगा।

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