सम्पत्तिकर की वसूली में गड़बड़ी, पांच  मंजिला अस्पताल दो मंजिल का कर! ,गोविन्द राठौर
सम्पत्तिकर की वसूली में गड़बड़ी, पांच 

मंजिला अस्पताल दो मंजिल का कर!

- बिचौली मर्दाना की जमीनों के डायवर्शन में अनुशंसा के नाम पर अड़ंगा 

इंदौर। नगर निगम के झोन क्रमांक 15 के वार्ड 71 अंतर्गत उषा नगर, द्रविड़ नगर तथा बैंक कॉलोनी की कई संपत्तियों के साथ वार्ड क्रमांक 82 के सुदामा नगर के एक अस्पताल में भी संपत्तिकर का घोटाला सामने आया है। अन्नपूर्णा मंदिर के नजदीक बने इस अस्पताल में दो मंजिला भवन का टैक्स लिया गया है। जबकि, मौके पर चार मंजिला निर्माण के तलघर भी बना है। इसके अलावा बायपास स्थित बिचौली मर्दाना की जमीनों के डायवर्शन के लिए नगर निगम की अनुशंसा के नाम पर निगम के भवन अधिकारियों ने न केवल संपत्ति मालिकों के काम में अड़ंगा लगाया वरन नगर निगम एवं शासन को होने वाली आय का रास्ता भी बंद कर दिया।   
 नगर निगम झोन क्रमांक 15 के राजस्व अमले द्वारा लगातार गड़बड़ी की जा रही है। वार्ड 71 के बाद अब वार्ड क्रमांक 82 में भी गड़बड़ी सामने आ रही है। बिल कलेक्टरों द्वारा कहीं व्यवसायिक संपत्ति का आवासीय तो कहीं तो कहीं बहुमंजिला निर्माण वाली संपत्ति में क्षेत्र और मंजिले कम कर निगम को चूना लगाया जा रहा है। झोन क्रमांक 15 के वार्ड क्रमांक 82 में बने खंडेलवाल अस्तपाल की इमारत 1500 वर्गफीट पर चार मंजिल बना हुआ है, लेकिन नगर  निगम की राजस्व टीम ने 1050 वर्गफीट दो मंजिला निर्माण का टैक्स लेकर नगर निगम को वसूल की गई राशि से देढ़ गुना की चपत लगा दी है। इस अस्पताल से दो मंजिला भवन का संपत्तिकर लिया है जबकि चार मंजिला इमारत में तीन मंजिल अस्तपाल के लिए उपयोग किया जाता है वहीं सबसे ऊपर की एक मंजिल पर निवास है। इसके अलावा एक तलघर भी बना हुआ है। 

भवन अधिकारी ने चूना लगाया 
  नगर निगम के अधिकारी अपनी कमाई के चक्कर में निगम के हितों को ताक में रखकर काम करते हैं। पिछले दिनों शहरी सीमा में शामिल हुए गांव बिचौली मर्दाना के कुछ खसरों के डायवर्शन के लिए निगम आयुक्त आशीष सिंह पर मामला छोड़ दिया था। डायवर्शन के लिए एसडीओ को नगर निगम की रिपोर्ट की आवश्यकता है। निगम आयुक्त ने इस मामले में भवन अधिकारी दिनेश शर्मा तथा अश्विन जनवदे सहित तीन लोगों की टीम बनाई। इस टीम ने मौके पर कच्चा रास्ता एवं 10 से 20 हजार वर्गफीट प्लाटों की सुरक्षा के लिए बनाई गई बाउंड्री वाल को निर्माण बताकर खाली पड़ी जमीन पर अवैध कालोनी बताई जा रही है। कुल मिलाकर बिचौली में इस तरह के 40 से अधिक बड़े भूखंडों से नगर निगम को मिलने वाले राजस्व तथा टीएनसी तथा डायवर्शन के रूप में मप्र शासन को मिलने वाले लाभ में जांच अधिकारियों ने टांग अड़ा दी। भूमि विकास अधिनियमों के अनुसार किसी भी जमीन पर पांच या इससे अधिक कच्चे- पक्के निर्माण पाए जाने पर ही अवैध कालोनी मानी जाएगी, जबकि बिचौली मर्दाना की इन सभी जमीनों पर किसी तरह का निर्माण नहीं है। 
यह है पूरा मामला 
बायपास से लगे बिचौली मर्दाना के कुछ खसरों पर जिला प्रशासन की टीम ने अवैध कॉलोनी बसी होना बता दी थी। जिला प्रशासन की इस गड़बड़ रिपोर्ट पर कुछ जमीन मालिकों ने आपत्ति ली थी। उक्त गांव अब शहरी सीमा में आ गया जिससे संभाग आयुक्त आकाश त्रिपाठी ने जमीन का डायवर्शन हो सकता है या नहीं इसका फैसला निगम आयुक्त पर छोड़ दिया। उन्होंने जनवदे तथा शर्मा सहित तीन लोगों की टीम बनाकर मौका मुआयना करने के निर्देश दिए थे। 

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