फर्जीवाड़े से निपटने के लिए कॉलोनी और  टाउनशिप के लिए 'रेरा' ने फार्मेट बदला  
फर्जीवाड़े से निपटने के लिए कॉलोनी और 

टाउनशिप के लिए 'रेरा' ने फार्मेट बदला 

- इंजीनियर सर्टिफिकेट के नाम पर फर्जी स्टेटस रिपोर्ट सबमिट कर रहे

इंदौर। शहर में शासकीय व निजी काम करने वाले बिल्डरों पर 'रेरा' ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। अब उन्हें किए गए कामों का वास्तविक हिसाब भी देना होगा। फर्जी इंजीनियर सर्टिफिकेट से निपटने के लिए 'रेरा' ने उक्त आदेश जारी किए हैं। विकसित होने वाली कालोनी व टाउनशिप के लिए भी नया फार्मेट तैयार किया गया है।
   'रेरा' के नियमों के अनुसार बिल्डरों को कॉलोनी और बिल्डिंगों की मासिक स्टेट्स रिपोर्ट सबमिट करना होती है। इसे इंजीनियर सर्टिफिकेट कहते हैं। विभिन्न शिकायतों के आधार पर 'रेरा' ने पाया कि बिल्डरों द्वारा इंजीनियर सर्टिफिकेट के नाम पर फर्जी स्टेटस रिपोर्ट सबमिट कर रहे हैं। यह 'रेरा' के लिए चौंकाने वाला मामला था। काफी मंथन के बपाद 'रेरा' ने तय किया कि सर्टिफिकेट का फार्मेट बदलकर ऐसा कर देना चाहिए, जिससे फर्जीवाड़े की गुंजाइश न रहे। नए फॉर्मेट मुताबिक जानकारी देना होगी कि बिल्डिंग की प्लिंथ, ब्रिक्स वर्क, कांक्रीट, फ्लोरिंग, लाइटिंग, वाटर सप्लाय, फायर फायटिंग सिस्टम, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट आदि क्या है। कॉलोनी की कांक्रीट रोड, सीवरेज लाइन, वाटर लाइन, बिजली लाइन, ट्रांसफार्मर ग्रिड सिस्टम और गैस पाइप लाइन कितनी बनी। रेरा तब तक कालोनी या बिल्डिंग कंप्लीट नहीं मानता जब तक की निगम या स्थानीय निकाय कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी न कर दे। एजेंसियां कम्प्लीशन सर्टिफिकेट तभी जारी करेगी, जब काम पूरा होगा। यदि कोई बिल्डर कहता है कि  उसके पास काम पूरा करने के बाद भी कम्पलीकेशन नहीं मिल रहा है तो ऐसे प्रोजेक्ट में 'रेरा' अपने स्तर पर इंजीनियर भेजकर प्रोजेक्ट का स्टेट्स सर्टिफाई कर सकता है। हालांकि 'रेरा' इंजीनियर इंस्पेक्शन की फीस लेता है।
जिम्मेदारी होगी तय
  नए फार्मेट में बिल्डर जो जानकारी देता है, यदि किसी शिकायत या जांच के बाद गलत निकलती है तो बिल्डर के साथ ही साइन करने वाले इंजीनियर की जवाबदेही भी तय होगी। इनके खिलाफ 'रेरा' कार्रवाई करेगा। 'रेरा' संबंधित प्रोजेक्ट पर रोक भी लगा सकता है।

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