जाति प्रमाण पत्र स्कूलों में न बनने  से लोकसेवा केन्द्रों पर भीड़ बढ़ी 
जाति प्रमाण पत्र स्कूलों में न बनने 

से लोकसेवा केन्द्रों पर भीड़ बढ़ी 

इंदौर। शहर के कई निजी स्कूलों में जाति प्रमाण पत्र नहीं बनवाए जा रहे। इसके पालकों को लोकसेवा केन्द्रों के चक्कर काटने पर मजबूर होना पड़ रहा है। घंटों केन्द्र में कतार लगाने के बाद वे जैसे-तैसे आवेदन जमा कर पाते हैं। जबकि, इस बारे में स्थिति स्पष्ट है कि जाति प्रमाण पत्र स्कूलों में ही बनेंगे। 

  माध्यमिक शिक्षा मंडल के स्पष्ट आदेश हैं कि स्कूलों में अध्ययनरत बच्चों के जाति प्रमाण पत्र तैयार कराए जाएं। इसके आदेश भी स्कूल संचालकों को दिए जा चुके हैं। कुछ संचालकों ने आदेश का अक्षरश: पालन करते हुए प्रमाण पत्र तैयार कराने में रुचि दिखाई, जिसका छात्रों का लाभ मिला है। वहीं कुछ स्कूल संचालकों ने आदेशों की अवहेलना कर दी। वे छात्रवृत्ति का लाभ देने से बचने के लिए जाति प्रमाण पत्र तैयार कराने में सहयोग नहीं कर रहे। नए प्रवेशी बच्चों से प्रमाण पत्र हांसिल कर लेते हैं, लेकिन छात्रवृत्ति कब मिलेगी, यह बता नहीं पा रहे। खासकर, वे निजी स्कूल जो ट्रस्ट द्वारा संचालित हो रहे हैं। ट्रस्टी प्रमाण पत्र के लिए रुचि नहीं लेते। यही कारण है कि दिनों दिन पालिका प्लाजा स्थित लोकसेवा केन्द्रों पर आवेदकों की भीड़ बढऩे लगी है। 

  उधर, कलेक्टोरेट स्थित लोकसेवा केन्द्र के कर्मचारियों को हटाने के बाद पालिका प्लाजा केन्द्र पर दबाव अत्यधिक बढ़ गया है। केन्द्र के खुलने से लेकर बंद होने तक भीड़ लगी रहती है। जगह कम होने से आवेदक परेशान होते रहते हैं। जिला शिक्षा विभाग व आदिम जाति कल्याण विभाग के सूत्रों की मानें तो नवरात्रि के बाद स्कूलों की जांच की जाएगी। जांच में यह देखा जाएगा कि कितने बच्चे छात्रवृत्ति के पात्र हैं और कितने बच्चों के जाति प्रमाण पत्र के लिए स्कूल संचालकों ने दस्तावेज हासिल किए हैं। जिन संचालकों ने दस्तावेज हासिल नहीं किए हैं, उन्हें निर्देश दिया जाएगा कि वे जल्द प्रमाण पत्र बनवाकर दें, अन्यथा उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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