बीमा पॉलिसी के नाम पर ठगी करने  वाला दिल्ली का संगठित गिरोह बंदी  
बीमा पॉलिसी के नाम पर ठगी करने 

वाला दिल्ली का संगठित गिरोह बंदी  

- डेबिट कार्ड, चार-चार वोटर आई और कई कंपनियों के सील भी मिले 

 इंदौर। इंश्योरेंस पॉलिसी के नाम पर इन्दौर के रहने वाले 75 वर्षीय बुजुर्ग हरिकृष्ण शुक्ला से 65 लाख रूपए की धोखाधडी करने का मामला सामने आया है। जानकारी के मुताबिक एक संगठित गिरोह का सरगना अपने साथियों के साथ मिलकर अलग-अलग कंपनियों के नाम से बुजुर्ग के साथ धोखाधड़ी कर रहा था। रविवार को इंदौर साइबर पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
   हरिकृष्ण शुक्ला ने साइबर एसपी जितेंद्र सिंह को जानकारी देते हुए कहा वर्ष 2010 से 2018 तक अलग-अलग नामों से फोन करके कुछ लडक़े-लड़कियां विभिन्न-विभिन्न पॉलिसियों के नाम से रुपए ऐंठ रहे थे। शुक्ला बोले पॉलिसी के लिए रुपए जमा करना मुझे सही लगा इसलिए मैंने रुपए जमा करा दिए। इस तरह इतने सालों में आरोपियों ने मुझसे करीब 65 लाख रुपए फर्जी पॉलिसियों के नाम पर जमा करा लिए। किसी तरह का संपर्क न होने पर जब शुक्ला ने पुलिस में शिकायत की, तो पुलिस ने तुरंत विवेचना प्रांरभ कर दी और टीआई अमरीश मिश्रा के नेतृत्व में जांच टीम बनाई। टीम ने दिल्ली में रहकर भी रैकी की। पता चला कि अलग-अलग नाम-पतों का उपयोग हुआ है जिसमें तीन आरोपी सामने आए। पुलिस ने रविवार को तीनों आरोपियों वरुण राय निवासी मुजफ्फर नगर, जितेन्द्र शर्मा और सुमित नामक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने एक सीए भी रखा हुआ था जिससे वे अलग-अलग फर्जी डॉक्यूमेंट्स तैयार कराता थें। इनके पास से डेबिट कार्ड, चार-चार वोटर आई और कई कंपनियों के सील भी मिले है। इसमें कई कंपनियों के नाम भी सामने आए है। पुलिस के मुताबिक अपराध दर्ज कर लिया गया है। मामले में आगे की जांच भी होनी है।
   आरोपियों ने पुलिस रिमांड में पूछताछ में बताया कि हम लोग अपनी पहचान को छुपाते हुए अपने फोटो लगाकर फर्जी नाम पतों से जाली वोटर आइडी कार्ड, पेन कार्ड, ड्रायविंग लाइसेंस बनवाते थे। उन्ही फर्जी दस्तावेजों से फर्म, कम्पनियां बनाकर कम्पनियों के नाम से फर्जी करंट एवं सेविंग बैंक खाते खुलवाते थे। इन फर्जी बैंक खातो में इनके अन्य साथियों के द्वारा फोन लगाकर इंश्योरेंस पॉलिसी के नाम पर अतिरिक्त लाभ देने का लालच देकर 75 वर्षीय वृध्द फरियादी हरिकृष्ण शुक्ला से विभिन्न पॉलिसियों के नाम पर लाखों रूपए डलवाए गए थे। जिन्हें आरोपियों द्वारा अपने एटीएम कार्ड एवं सेल्फ चेक के माध्यम से केश विड्रोल कर अपना अपना हिस्सा बाँट लेते थे। आरोपियों द्वारा पूछताछ में यह भी बताया गया कि वह इन फर्जी नाम पतो पर बनी कम्पनियों के इन्कम टैक्स रिटर्न भी फर्जी तरीके से भरवाया करते थे। 

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